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स्वदेशी आंदोलन

भारतीयों ने अंग्रेजों से अपनी बात मनवाने के लिए एक और उपाय किया यह तय हुआ कि लोग अब केवल अपने देश यानी स्वदेश में ही बने सारे सामान प्रयोग करेंगे विदेशी सामानों का उपयोग बंद किया जाएगा इसे स्वदेशी आंदोलन कहा गया जनता ने स्थान स्थान पर विदेशी कपड़ों की होलियां जलाई विदेशी सामानों की दुकानों पर जाना बंद कर दिया अब आंदोलन सारे भारत में फैल गया अतः सन 1911 में अंग्रेज सरकार को बंगाल के विभाजन का फैसला बदलना पड़ा जनता की मांग थी उनके नेताओं को सरकार में शामिल किया जाए अंग्रेज सरकार ने यहां चुनाव में धर्म को आधार बनाया उसने जनता के कुछ नेताओं को सरकार में शामिल कर लिया इसी बीच प्रथम विश्व युद्ध छिड़ गया था इसमें ब्रिटिश सरकार शामिल थी वह इस युद्ध में भारत का सहयोग चाहते थे नेता सोचते थे कि युद्ध समाप्त होने पर अंग्रेज देश से आजाद कर देंगे लेकिन अंग्रेजों ने ऐसा नहीं किया

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